प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समाजवादी पार्टी के विधायक रमाकांत यादव की दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि याची का लंबा आपराधिक इतिहास है और ट्रायल कोर्ट द्वारा उसे दोषी ठहराया जा चुका है। अपील खारिज होने के बाद पुनरीक्षण याचिका विचाराधीन है, ऐसे में जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।
क्या है मामला?
फरवरी 2022 में आजमगढ़ के अहरौला में सरकारी दुकान पर बेची गई नकली शराब से 9 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने अहरौला और फूलपुर थाने में रमाकांत यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। बाद में, 11 दिसंबर 2024 को पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया।

पहले भी खारिज हो चुकी है जमानत याचिका
रमाकांत यादव 30 जुलाई 2022 से जेल में बंद हैं। इस मामले में उनकी पहली जमानत अर्जी 28 फरवरी 2023 को खारिज हो चुकी थी। इसके बाद उन्होंने दूसरी बार जमानत याचिका दाखिल की थी, जिसे हाईकोर्ट ने फिर से खारिज कर दिया।
क्या कहा कोर्ट ने?
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि रमाकांत यादव का आपराधिक रिकॉर्ड लंबा है और ट्रायल कोर्ट में दोष सिद्ध होने के बाद उनकी अपील भी खारिज हो चुकी है। ऐसे में फिलहाल जमानत देना उचित नहीं होगा।
निष्कर्ष
नकली शराब कांड में सपा विधायक रमाकांत यादव को राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट द्वारा लगातार दूसरी बार जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद उनकी रिहाई की संभावना फिलहाल टल गई है।
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