आजमगढ़। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए केंद्र निर्धारण में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि परीक्षा केंद्र निर्धारण में मनमानी की गई और परीक्षा केंद्र बनाने के लिए अवैध वसूली की गई।
शिक्षक संगठनों और विद्यालयों द्वारा लगातार की जा रही शिकायतों के बाद अपर निदेशक के आदेश पर संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़, दिनेश सिंह ने मामले की जांच कराई। जांच में परीक्षा प्रभारी उमाकांत यादव और सहायक दिलीप पर लगे आरोप सही पाए गए। इसके बाद दोनों को निलंबित कर दिया गया और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, जाफरपुर में संबद्ध कर दिया गया।
गड़बड़ी का खुलासा और कार्रवाई
- शिकायतों की अनदेखी: शिक्षक संगठनों ने केंद्र निर्धारण में धांधली को लेकर पहले भी जिले स्तर पर शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- बड़े पैमाने पर गड़बड़ी: जिले में 282 परीक्षा केंद्र बनाए गए, जिसमें आरोप है कि प्रत्येक केंद्र के लिए ₹2.5 लाख तक की वसूली की गई।
- जांच में खुलासा: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के संरक्षक और नेता विरोधी दल लाल बिहारी यादव की शिकायत पर जांच हुई, जिसमें कई आरोप सही पाए गए।
- कार्रवाई: संयुक्त शिक्षा निदेशक दिनेश सिंह ने अपर निदेशक के निर्देश पर परीक्षा प्रभारी उमाकांत यादव और उनके सहायक दिलीप को निलंबित कर दिया।

आगे की कार्रवाई
शिक्षा विभाग ने इस पूरे मामले में गहन जांच के आदेश दिए हैं। इससे पहले रामजन्म सिंह व श्री दुर्गाजी इंटर कॉलेज ने भी सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज से शिकायत की थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
इस घटना ने यूपी बोर्ड परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गड़बड़ी में और कौन-कौन से दोषियों पर कार्रवाई करता है।
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