नई दिल्ली। चुनावी पारदर्शिता को बढ़ाने और फर्जी मतदाताओं की पहचान के उद्देश्य से वोटर आईडी को आधार से जोड़ने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। चुनाव आयोग इस दिशा में गंभीरता से काम कर रहा है और जल्द ही इसे लागू करने की योजना पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है.
इस संबंध में अगले हफ्ते चुनाव आयोग की एक अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय और आधार जारी करने वाली संस्था यूआईडीएआई के शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। इस बैठक में वोटर आईडी और आधार लिंकिंग की प्रक्रिया को लेकर आवश्यक दिशानिर्देशों पर चर्चा की जाएगी।
फर्जी वोटर्स पर लगेगा लगाम
वोटर आईडी को आधार से जोड़ने की यह पहल चुनावी पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी एवं डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान करने के लिए की जा रही है। इस प्रक्रिया से मतदाता सूची को और अधिक सटीक और त्रुटिहीन बनाया जा सकेगा, जिससे चुनावों में धांधली की संभावनाओं को कम किया जा सकेगा।
पहले से चल रही है वोटर आईडी-आधार लिंकिंग प्रक्रिया
गौरतलब है कि चुनाव आयोग पहले से ही मतदाता पहचान पत्र को आधार से जोड़ने की प्रक्रिया को लागू कर चुका है, लेकिन यह पूरी तरह से स्वैच्छिक है। सरकार ने 2021 में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन कर यह प्रावधान किया था कि मतदाता आधार से अपनी पहचान सत्यापित कर सकते हैं। हालांकि, इसे अनिवार्य नहीं बनाया गया है।
चुनाव आयोग की इस बैठक के बाद इस दिशा में नए दिशानिर्देश जारी किए जा सकते हैं और इसे लागू करने की प्रक्रिया को और तेज किया जा सकता है। यदि यह योजना प्रभावी रूप से लागू होती है, तो आगामी चुनावों में इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है।




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