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आजमगढ़: विशेष किशोर पुलिस इकाई व मानव तस्करी रोधी थाना की मासिक समीक्षा बैठक सम्पन्न, बाल संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर हुई विस्तृत चर्चा

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आजमगढ़, 27 जून 2025। जनपद आज़मगढ़ में विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) व मानव तस्करी रोधी थाना (AHT) की मासिक समीक्षा एवं समन्वय गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह बैठक पुलिस लाइन स्थित सभागार में अपर पुलिस अधीक्षक (यातायात)/नोडल अधिकारी ए.एच.टी./एस.जे.पी.यू. की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई, जो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ के निर्देशन में आयोजित की गई थी।

बैठक का उद्देश्य जिले में किशोरों और महिलाओं से जुड़े संवेदनशील मामलों की समीक्षा करना, पुलिस, प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों के मध्य समन्वय स्थापित करना तथा मानव तस्करी व किशोर अपराध नियंत्रण हेतु ठोस रणनीति बनाना रहा।

बैठक में शामिल प्रमुख अधिकारी एवं प्रतिनिधिगण:

  • डी.पी.ओ. श्री डी.सी. त्रिपाठी (महिला एवं बाल विकास विभाग)
  • सहायक अभियोजन अधिकारी श्री विमलेश कुमार पाण्डेय
  • श्रम प्रवर्तन अधिकारी श्री मो0 नजरे आलम
  • श्री शिवनारायण (बेसिक शिक्षा विभाग)
  • सीडब्लूसी अध्यक्ष श्री रजनीश श्रीवास्तव
  • किशोर न्याय बोर्ड सदस्य श्री रवि प्रताप सिंह
  • श्री संजय शाही (चाइल्ड लाइन आजमगढ़)
  • वन स्टॉप सेंटर की केस वर्कर ममता यादव
  • जन विकास संस्थान से श्री अनिल कुमार (प्रोजेक्ट मैनेजर)
  • आरपीएफ, जीआरपी, डीसीआरबी, महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन के प्रतिनिधि
  • सभी थानों के बाल कल्याण पुलिस अधिकारी व सहायक बाल कल्याण अधिकारी

बैठक में हुई प्रमुख चर्चाएं:

  • बाल गुमशुदगी, बाल श्रम, बाल विवाह, भिक्षावृत्ति की रोकथाम
  • पीड़िता के आवासन की समस्याएं और वन स्टॉप सेंटर में आ रही चुनौतियां
  • लैंगिक समानता और नारी सशक्तिकरण
  • किशोर न्याय अधिनियम, 2015 में हुए संशोधनों की जानकारी
  • पोक्सो एक्ट के तहत एफआईआर के 24 घंटे के भीतर CWC को सूचना देना
  • फार्म A व B को भरने की प्रक्रिया, सामाजिक पृष्ठभूमि रिपोर्ट तैयार करना
  • रिमांड व मेडिकल के समय पुलिस का सादे वस्त्रों में रहना
  • प्रेस विज्ञप्तियों में पीड़िता या बाल अपचारी की पहचान गोपनीय रखने की सख्त हिदायत

अपर पुलिस अधीक्षक ने निर्देशित किया कि सभी बाल कल्याण अधिकारी कानूनों का अक्षरशः पालन करें एवं बच्चों के हित में कार्य करें। उन्होंने बताया कि पीड़ितों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए समुचित प्रक्रिया का पालन किया जाए।

इस गोष्ठी में पुलिस और सामाजिक संगठनों के समन्वय से किशोर और महिला अपराधों की रोकथाम हेतु प्रभावी रणनीति तय की गई। यह पहल जनपद में बाल एवं महिला संरक्षण के क्षेत्र में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

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