आजमगढ़। उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जहां करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से निजी अस्पतालों की मनमानी और अवैध वसूली का खेल बदस्तूर जारी है। इसी बीच आजमगढ़ जिले से एक चौंकाने वाला वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक डॉक्टर ने नशे की हालत में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
यह वायरल वीडियो लालगंज स्थित शिवांगी हॉस्पिटल के डॉक्टर अखिलेश यादव का बताया जा रहा है, जिसमें वे नशे की हालत में निजी मां शांति हॉस्पिटल के डॉक्टर पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते दिख रहे हैं। वीडियो में उन्होंने दावा किया है कि डॉक्टर की गलती से एक मरीज को गलत इंजेक्शन दे दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
डॉ. अखिलेश ने वीडियो में यह भी कहा कि लालगंज क्षेत्र में सिर्फ 5-7 डॉक्टरों को छोड़कर बाकी सभी डॉक्टर केवल 5वीं या 10वीं पास हैं और बिना किसी मेडिकल डिग्री के अस्पताल चला रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन फर्जी अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि लालगंज क्षेत्र से मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को ₹5 लाख प्रति सप्ताह ‘हफ्ता’ जाता है, जिससे उन्हें किसी कार्यवाही का कोई डर नहीं है।
वीडियो में डॉक्टर द्वारा की गई ये सनसनीखेज बातें वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दीं। वीडियो वायरल होते ही पूरे लालगंज क्षेत्र के स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों में हड़कंप मच गया है।
जब इस मामले पर मीडिया ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार से संपर्क किया तो उन्होंने वायरल वीडियो की जानकारी से इनकार किया। उन्होंने कहा, “मुझे इस वीडियो की जानकारी अभी मीडिया के माध्यम से मिली है। वीडियो की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अगर किसी मरीज की मौत लापरवाही से हुई है तो पुलिस कार्यवाही भी की जाएगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि वायरल वीडियो में दिख रहा व्यक्ति डॉक्टर है या फर्जी डॉक्टर, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा। हाल ही में शासन के निर्देश पर फर्जी अस्पतालों और पैथोलॉजी केंद्रों पर अभियान चलाया गया था, जिसमें कुछ अस्पताल सीज भी किए गए थे। बावजूद इसके, कुछ सीज हॉस्पिटल अब भी अधिकारियों की मिलीभगत से संचालित किए जा रहे हैं।
सवाल उठता है कि जब सरकारी स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के प्रयास हो रहे हैं, तब ऐसे वीडियो और खुलासे आखिर क्यों सामने आ रहे हैं? क्या जांच के बाद दोषियों पर वाकई सख्त कार्यवाही होगी या एक बार फिर यह मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा?
अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं की इस गिरती हालत को सुधारने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।



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